
रोहिताश खिलेरी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए साझा की, जिसके बाद यह खबर देश-विदेश में तेजी से वायरल हो रही है।
❄️ जानलेवा हालात में भी नहीं मानी हार
माउंट एल्ब्रुस पर हालात किसी मौत के जाल से कम नहीं थे।
तापमान: –40 डिग्री सेल्सियस
विंड चिल: –50 डिग्री से नीचे
तेज हवाएं: 60 किमी प्रति घंटा
इतने खतरनाक मौसम में भी रोहिताश पूरी तरह अकेले (सोलो) पहाड़ पर डटे रहे और 24 घंटे का लक्ष्य पूरा किया।
⏳ 8 साल का संघर्ष, तब जाकर मिला मुकाम
यह सफलता एक दिन की नहीं बल्कि 8 साल के संघर्ष का नतीजा है।
2018 में पहली बार माउंट एल्ब्रुस फतह किया
2020 में एक गाइड की जान बचाने के लिए अपना 24 घंटे का लक्ष्य छोड़ना पड़ा
2023 में खराब मौसम के कारण सिर्फ 4 घंटे बाद लौटना पड़ा
2026 में आखिरकार सपना हुआ पूरा
🇮🇳 तिरंगे के लिए समर्पित उपलब्धि
रोहिताश खिलेरी ने इस उपलब्धि को भारतीय तिरंगे और देश के नाम समर्पित किया है। उनका यह कारनामा न सिर्फ शारीरिक ताकत बल्कि मानसिक दृढ़ता और देशभक्ति का भी प्रतीक है।
🌟 युवाओं के लिए प्रेरणा
हरियाणा के एक साधारण परिवार से निकलकर विश्व रिकॉर्ड बनाना लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। रोहिताश खिलेरी ने साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों तो दुनिया की कोई भी ऊँचाई नामुमकिन नहीं।

















